श्रीरत्नाकरदारिकामुखमहापद्मार्कधुर्यः प्रभु-
र्दैत्याख्येतिमहाटवीकलुषभूदाह्योत्सुकोपाहितः।
वैकुण्ठाधिपतिर्हरिस्त्रिभुवनोद्धारार्थसङ्कल्पितः
सोऽयं रक्षतु विश्वपाऽतिविमलः श्रीवेङ्कटाधीश्वरः॥

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(19.02.17, शार्दूलविक्रीडित)

श्रीवैष्णवी तरुणचन्द्रप्रभाविताभा
श्रीवैष्णवी तरुणचन्द्रकिशोररूपा।
श्रीवैष्णवी तरुणचन्द्रशिरोऽभिरामा
श्रीवैष्णवी तरुणचन्द्रसुसेव्यमाना।।

(16.02.2017, 09:18, Delhi)

शुकशास्त्रकथाविधापञ्चकम्

Yesterday, while discussing about Srimad Bhagavatam, these verses were composed by me by chance. My friend Pandit Sharada  Prasad Tripathiji just wrote them while I was dictating.

अनावश्यकवार्ताभिर्रहिता ब्रह्मबोधिनी ।
श्रीमद्भागवती गाथा कलौ मोक्षप्रदायिनी ॥
भावार्थ:- अनावश्यक बातों व दृष्टांतोंसे रहित (मूल) श्रीमद्भागवतकथा ही ब्रह्मका बोध करवानेवाली होनेसे कलियुगमें मोक्ष प्रदान करती है।

मूलाश्रिता सदा कुर्याच्छुकशास्त्रकथा शुभा ।
सतां सङ्गे महत्स्थाने विद्वद्भिर्विबुधैस्तथा ॥
भावार्थ:-
विद्वानों व शास्त्रज्ञोंके द्वारा, संतोंके संगमें, दिव्यस्थानमें, मूल-कथापर आश्रित शुभ-लक्षणोंवाली भागवतकथा ही कही जानी चाहिये।

व्यासपीठसमासीनो वैदिको द्विजभूषणः ।
संस्कृतज्ञो भवेद्विप्रो सतां सेवी च धीधनः ॥
भावार्थ:-
वैदिक-मर्यादाको माननेवाले संस्कृतज्ञ, संतसेवी, बुद्धिमान्, ब्राह्मणकुलके भूषणस्वरूप वेदपाठी व्यक्तिको ही व्यासपीठपर बैठाना चाहिये।

गङ्गाद्वारे प्रयागे च वाराणस्यां गिरौ तथा ।
ज्ञानमार्गप्रधानेन सेवितेयं कथा बुधैः ॥
कालिन्दीतटसंस्थाने धन्ये वृन्दावने पुरे ।
भक्तिमार्गेण वै गेया श्रीमद्भागवती कथा ॥
भावार्थ:- हरिद्वार, प्रयाग, वाराणसी, हिमालयक्षेत्र आदिमें बुद्धिमानोंके द्वारा भागवतकथा ज्ञानमार्गकी प्रधानतासे सेवित होती है। इसके विरुद्ध, यमुनातटपर स्थित वृन्दावनमें यह कथा भक्तिमार्गके अवलंबनसे ही गायी जाती है।

हनुमन्मन्दिरे रम्ये रामचन्द्रप्रसादतः ।
अङ्कुरेण हि सम्प्रोक्ता शुकशास्त्रकथाविधा ॥
त्रिपाठिना च विप्रेण श्रुत्वा वै लिखितं शुभम् ।
प्रसादशारदारूपं धीमद्भ्यो भक्तिपूरितम् ॥
भावार्थ:-
भगवान् श्रीरामचन्द्रके कृपाप्रसादसे अंकुरनागपालके द्वारा, यह ‘शुकशास्त्रकथाविधा’ [श्रीमद्भागवतकथाकी विधि], दिल्ली-विजयनगर-स्थित रमणीय हनुमान्-मंदिरमें [तात्कालिकी श्लोक-रचनापूर्वक] कही गयी। पंडित शारदाप्रसाद-त्रिपाठीद्वारा यह भक्तिभावपूरित, सरस्वतीका प्रसादस्वरूप शुभ श्लोकपञ्चक, बुद्धिमानोंके लाभार्थ, मुझसे सुनकर लिपिबद्ध किया गया इत्यलम्॥

(05.12.2016, 20:25-20:43, Delhi)
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